10 اگست 2013

रॉडिया टेप प्रकरण को दफनाने का असफल प्रयास

बहुचर्चित रॉडिया टेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा स्टेंड ले लिया है। अदालत ने नीरा रॉडिया के औद्योगिक घरानों के प्रमुखों, नेताओं और दूसरे व्यक्तियों की टेप की गई बातचीत से मिली जानकारी के आधार पर पांच साल तक कोई कार्रवाई नहीं करने पर आयकर विभाग और सीबीआई को आड़े हाथों लिया। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा की खंडपीठ ने कहा कि यह अच्छी स्थिति नहीं है। अदालत ने कहा कि यह बातचीत पांच साल पहले टेप की गई थी लेकिन इस दौरान सरकारी अधिकारी चुप्पी साधे रहे। न्यायाधीश जानना चाहते थे कि क्या वे कार्रवाई के लिए अदालत के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं? अदालत ने आयकर विभाग को रॉडिया के टेलीफोन टेप करने के लिए अधिकृत किए जाने से संबंधित सारा रिकार्ड पेश करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने आयकर विभाग को यह भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि टेपिंग की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों को सौंपी गई थी क्या उन्होंने रिकार्डिंग के विवरण के बारे में अपने वरिष्ठ अफसरों को सूचित किया और इस बातचीत में जिन आपराधिक मामलों का जिक्र हुआ है क्या उनके बारे में सीबीआई को सूचित किया गया था? वित्तमंत्री को 16 नवम्बर 2007 को मिली एक शिकायत के आधार पर नीरा रॉडिया के फोन की निगरानी के दौरान यह बातचीत रिकार्ड की गई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नौ साल के भीतर ही रॉडिया ने तीन सौ करोड़ रुपए का कारोबार उद्योगपतियों और मंत्रियों के सहयोग और पत्रकारों की मदद से खड़ा कर लिया है। सीबीआई ने पिछली तारीख में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह न्यायालय के निर्देशों पर कुछ मामलों में केस दर्ज कर सकती है क्योंकि नीरा रॉडिया की औद्योगिक घरानों के प्रमुखों, नेताओं और दूसरे व्यक्तियों के साथ रिकार्ड की गई वार्ता से आपराधिकता का पता चलता है। अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त छह सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट से उपजे 10 बिन्दुओं के अंश पढ़ते हुए कहा कि पहली नजर में कुछ पहलुओं पर संदेह होता है जिसके लिए सीबीआई को प्रारम्भिक जांच के लिए मामला दर्ज करना होगा। न्यायालय ने टेलीफोन पर बातचीत के कथित आपत्तिजनक विवरण को लेकर आयकर विभाग तथा दूसरे विभागों की निक्रियता पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने कहा कि हम यह जानकर आश्चर्यचकित हैं कि यह बातचीत वरिष्ठ अधिकारियों के पास उपलब्ध थी लेकिन विलम्ब ने इस मामले को लगभग निरर्थक बना दिया है। यदि उच्च अधिकारियों के साथ इसे साझा किया गया होता तो आज स्थिति भिन्न होती क्योंकि यह गम्भीर मामले हैं। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय टेलीग्राफिक कानून के तहत रॉडिया के फोन की बातचीत रिकार्ड करने के लिए गृह सचिव से मंजूरी ली गई थी। न्यायाधीशों ने कहा कि अधिकृत किए जाने और मंजूरी को लेकर कोई समस्या नहीं है। आज एएसजी हमें यह बताएं कि क्या जो  अधिकारी बातचीत सुनने के लिए अधिकृत थे ने गृह सचिव के साथ यह सूचना साझा की या नहीं? जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर गम्भीर है उससे तो नहीं लगता कि अब यह मामला दब जाएगा। हालांकि इस पूरे प्रकरण को दबाने में बहुत लोग दिलचस्पी ले रहे हैं।
                                                                        -अनिल नरेन्द्र


आपस में भिड़ने की बजाय पाक को माकूल जवाब दो

महीनेभर रोजे रखकर अपनी आत्मा को शुद्ध करने वाला पवित्र रमजान खत्म हुआ। आज ईद मनाई जा रही है। खुशियों के साथ गम भी लेकर आई यह ईद। पाकिस्तान और दहशतगर्दों के लिए पवित्र रमजान का कोई मतलब नहीं। अगर होता तो यूं बेरहमी से हमारे बहादुर जवानों का धोखे से घात लगाकर कत्ल न करते जो उन्होंने पुंछ में किया। हमारी नजरों में पाक सैनिकों और आतंकवादियों में कोई फर्प नहीं। कभी यह पीट-पीट कर हमारे जवान मार देते हैं तो कभी सिर कलम कर बतौर तोहफा साथ ले जाते हैं और फिर बड़ी शान से उसका ऐलान करते हैं। राजनेता भी इतने गिर चुके हैं कि बजाय पाकिस्तान को कोई माकूल जवाब देने के संसद में आपस में भिड़कर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं और केंद्र सरकार के रक्षामंत्री मंगलवार को संसद में बयान देते हैं कि हमला आतंकियों ने किया जो पाकिस्तानी सेना की यूनीफार्म में थे। जुलाई-अगस्त में 19 आतंकियों को मार गिराने के कारण यह बदले की कार्रवाई हुई। जब एंटनी के बयान पर सारे देश में हंगामा हो गया तो बृहस्पतिवार को एंटनी ने अपना बयान बदला और घटना के लिए पाकिस्तानी सेना को दोषी ठहराते हुए आगाह किया कि हमारे संयम और सैन्य क्षमता को हल्के में नहीं लिया जाए। हमारे नेताओं को बहादुर जवानों की शहादत पर कितना गम है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब शहीदों को उनके गृहराज्य में पहुंचाया गया तो बिहार के मारे गए पांच में से चार जवानों के शवों को पटना एयरपोर्ट पर हजारों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे पर बिहार सरकार का कोई भी मंत्री सम्मान देने के लिए एयरपोर्ट नहीं पहुंचा। जबकि पटना एयरपोर्ट के एकदम नजदीक कम से कम एक दर्जन मंत्रियों के बंगले हैं। नमक पर मिर्च छिड़कने से भी बाज नहीं आए बिहार के मंत्री। यह जवानों की शहादत का मजाक तक उड़ाने से नहीं कतराते। बिहार के ग्रामीण कार्यमंत्री भीम सिंह ने ऐसा ही एक बयान देकर शहीदों की शहादत का मजाक उड़ाया है। भीम सिंह ने कहा कि सेना और पुलिस में लोग मरने के लिए ही जाते हैं। पुंछ फायरिंग में घायल हुए पांचवें जवान लांस नायक संभाजी कुट्टे को दिल्ली के एम्स के ट्रामा सेंटर लाया गया। ट्रामा प्रमुख के मुताबिक संभाजी कुट्टे को अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर नहीं है। हमारी बुजदिल सरकार की वजह से पाकिस्तान का दुस्साहस बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय जवानों की हत्या के बाद मंगलवार दोपहर पाकिस्तान ने फिर संघर्षविराम का उल्लंघन किया। उरी सेक्टर में फायरिंग की। जब भारतीय सैन्य महानिदेशक ने बुधवार को हॉटलाइन पर पाक से आपत्ति जताई तो पाक ने भारत पर ही संघर्षविराम के उल्लंघन का आरोप मढ़ दिया। देश में पांच जवानों की इस निर्मम हत्या पर बवाल मचा हुआ है। बिहार में घटना से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली जाने वाली लिच्छवी एक्सप्रेस पर पथराव किया। छपरा-गोरखपुर पैसेंजर समेत कई ट्रेनें रोकीं। पंजाब के फगवाड़ा में गुस्साए लोगों ने प्रदर्शन किया जिसके चलते लाहौर-दिल्ली बस सेवा का रास्ता बदलना पड़ा। पाक सेना की करतूत व एंटनी के बयान पर यूपी-गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में लोगों ने पाकिस्तान का झंडा जलाकर प्रदर्शन किया। पाक सैनिकों के हमले में मारे गए सैनिकों में से एक जवान की पत्नी ने बिहार सरकार द्वारा मुआवजा लेने से इंकार कर दिया है। इस शहीद की पत्नी मुआवजे के स्थान पर पाक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही है। शहीद विजय राय की पत्नी पुष्पा राय ने पत्रकारों से कहा कि 10 लाख रुपए का मुआवजा उनके पति को वापस नहीं ला सकता। उन्होंने कहा कि मुआवजा नहीं चाहिए पर पति और दूसरे सैनिकों के हत्यारे पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी सैन्य जवाबी कार्रवाई होनी चाहिए। यह संयोग नहीं कि पिछले डेढ़ महीने में सेना ने घुसपैठ कर रहे 19 हार्डकोर आतंकियों को मार गिराया है। हमारे खिलाफ तालिबानियों का इस्तेमाल अब तक अफगानिस्तान में करता आया है। पिछले दिनों जलालाबाद में हमारे कांस्लेट पर हमला इसी कड़ी में था। अब कश्मीर में दहशतगर्दी की आग को फिर से  लपटों में तब्दील करने के लिए पाक सेना तालिबानियों की शरण में जा रही है। चूंकि जाड़ा आते ही बर्पबारी से घुसपैठ के रास्ते बन्द हो जाते हैं, इसलिए इन दिनों कश्मीर की सीमा के उस पार ऐसे घुसपैठियों की बेसब्र भीड़ जमा है। हमारी सेना और सरकार को इसी खतरनाक वास्तविकता से जूझना पड़ रहा है। बेशक पाकिस्तान से रिश्तों में सुधार दोनों की जरूरत हो सकती है पर यह सफल तभी होगी जब पाकिस्तान यह प्रॉक्सी वार खत्म करेगा। वास्तविक जमीनी परिस्थितियों को नजरअंदाज करके बातचीत के रास्ते हल ढूंढना बेमानी लगता है। लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
                                                                       -अनिल नरेन्द्र


09 اگست 2013

پیچھے نہیں ہٹیں گے چاہے مرکز سارے آئی ایس افسر بلالے،سپا

تلنگانہ ریاست بنانے کے بعد دیش کے مختلف حصوں میں الگ الگ ریاست بنانے کا جہاں سیلاب سا آگیا ہے۔تلنگانہ کا مسئلہ مرکزی حکومت کے لئے ایسا گلے کی ہڈی بنا کہ نہ تو نگلتے بن رہا ہے نہ اگلتے۔ وہیں اترپردیش کی سماج وادی پارٹی نے تو ساری حدیں پار کردی ہیں اور یوپی تو ایسا برتاؤ کررہا ہے جیسے کہ وہ ایک الگ دیش ہو۔ یوپی کا اقتدار چلا رہی سماجوادی پارٹی کی طرف سے پیر کے روز آئے بیان سے تو یہی لگتا ہے کہ پارلیمنٹ کے دروازے پر پارٹی سکریٹری جنرل رام گوپال یادو نے مرکزی سرکار کو کھلی دھمکی دے دی ہے۔ رام گوپال یادو نے کہا معطل آئی ایس افسر درگا شکتی ناگپال کے معاملے میں مرکز مداخلت بند کرے۔ اگر مرکز کو اپنے آئی ایس افسروں کی اتنی فکر ہے تو انہیں واپس بلا لے، ہم ریاست کے افسروں کے سہارے یوپی کی سرکار چلا لیں گے۔ یہ پہلی بار جب کسی ریاست نے اس طرح کی دھمکی دی ہے۔ ویسے درگا شکتی معاملے میں مرکزی سرکار کو محاسبہ کرنے کا اختیار ہے۔ وزیر اعظم کے دفتر میں وزیر مملکت اور ڈی او پی ٹی محکمے کے وزیر نارائن سوامی نے کہا کہ اگر درگاشکتی عرضی دیتی ہے تو اسکی معطلی کے معاملے پر غور ہوگا؟ دوسری طرف اپنی پارٹی اور اترپردیش کے وزیر اعلی اکھلیش یادو کے بچاؤ میں سپا ایم پی ڈمپل یادو نے کہا مہلا افسر کا مطلب یہ نہیں ہے کہ آپ کے خلاف کوئی کارروائی نہیں ہوگی۔ گوتم بودھ نگر کی معطل ایس ڈی ایم درگا شکتی ناگپال کو لیکر مچے سیاسی ہنگامے کو بے وجہ مانتے ہوئے ڈمپل یادو نے کہا کہ درگا کو چارج شیٹ دے دی گئی ہے۔ اس کے جواب کے بعد پتہ چل پائے گا کہ اس کا کیا موقف ہے۔ اس کی بنیادپر آگے کی کارروائی ہوگی۔ مرکزی وزیرہوا بازی اجیت سنگھ نے درگا شکتی ناگپال کی معطلی پر کہا کہ اترپردیش میں یہ پہلی بار نہیں ہورہا ہے۔ فی الحال وہاں ساڑھے چار وزیر اعلی ہیں۔ چار دیگر لوگ بھی سرکار چلا رہے ہیں۔ آدھے حصے کے طور پر اکھلیش یادو وزیر اعلی ہیں،ایسے میں سے ساڑھے چار وزیر اعلی میں سے کونسا اصل سرکار چلا رہا ہے یہ ریاست کے افسر شاہوں کو بھی نہیں پتہ۔ اترپردیش کے پچھلے اسمبلی انتخابات کے دوران اکھلیش یادو نے بار بار دوہرایا تھا اگر اس بار سماجوادی پارٹی کو اقتدار میںآنے کا موقعہ ملاتو وہ پچھلی غلطیوں کو نہیں دوہرائے گی۔ لیکن نوجوان وزیر اعلی نے اپنے اس وعدے کے بارے میں بار بار مایوس کیا ہے۔ ان کی سرکار وہی غلطیاں کررہی ہے جو سپا کی پچھلی حکومتوں نے کی تھیں۔ لوگوں نے اکھلیش سے بہت امیدیں لگائی تھیں لیکن دبنگی اور ناجائز دھندوں میں لگے لوگوں کا راج پھر شروع ہوگیا ہے۔ تکلیف دہ بات یہ ہے کہ وہ اقتدار اعلی کی سرپرستی پانے میں کامیاب ہوجاتے ہیں اور بھگتنا پڑتا ہے ایماندار اور وفادار افسروں کو۔ ایسا نہ ہوتا تو درگا شکتی ناگپال کو یوں بے عزت کرکے نہ نکالا جاتا۔ خود وزیر اعلی کہتے ہیں درگا شکتی کو اس لئے معطل کیا گیا کیونکہ ان کی ایک کارروائی سے فرقہ وارانہ بھائی چارے کا ماحول بگڑنے کا اندیشہ تھا۔ غور طلب ہے گوتم بودھ نگر کی ایس ڈی ایم رہتے ہوئے درگا شکتی نے ضلع کے بادل پور گاؤں میں سرکاری زمین پر کھڑی کی جارہی مسجد کی دیوار گروا دی تھی۔ اول تو اس پر بھی جھگڑا ہے کہ دیوار کس نے گروائی اور کیوں گروائی، یہ ایک منٹ کے لئے مان بھی لیا جائے کہ انہوں نے ایسا کیا تو کیا غلط کیا؟ کیا سپریم کورٹ نے صاف احکامات نہیں دئے کہ سرکاری زمین پر کسی نا جائز تعمیرات کو ہٹا دیا جائے ؟ درگا نے اپنے فرائض کی تعمیل کرتے ہوئے ایسا قدم اٹھایا لیکن اس کا خمیازہ انہیں معطلی کی شکل میں بھگتنا پڑا۔ ایک نوجوان ایماندارافسر کو ملی اس سزا نے ریاستی سرکار کو ہی کٹہرے میں کھڑا کردیا ہے۔ ضلع افسر نے بھی سرکار کو بھیجی اپنی رپورٹ میں درگا شکتی کو کلین چٹ دی ہے۔ پھر ممبر اسمبلی نریندر بھاٹی کی منظوری نے بھی وزیراعلی کی دلیل کی ہوا نکال دی ہے۔ بھاٹی نے دعوی کیا ہے انہوں نے سپا کی سینئر لیڈرشپ سے بات چیت کر معطلی کا راستہ ہموار کرایا تھا۔ درگا شکتی کی معطلی پر دیش بھر میں ناراضگی اور رد عمل سامنے آیا ہے۔ آئی ایس افسر فیڈریشن سے لیکر سول تنظیموں اور سیاسی پارٹیوں کی جانب سے بھی احتجاج کی آواز اٹھی ہے۔ سونیا گاندھی نے خود وزیر اعظم کو خط لکھ کر درگا کے ساتھ انصاف کو یقینی بنانے کی اپیل کی تھی۔ ان کے اس خط کے بعد مرکزی سرکار کو اترپردیش سرکار سے جواب طلب کرنا پڑا۔ لیکن سپا سرکار نے جواب میں کہا کہ آپ چاہو تو اپنے سارے آئی ایس افسر واپس بلا لو اور اب تک کے رویئے سے یہ نہیں لگتا کہ وہ اپنے فیصلے سے پیچھے ہٹنے والی ہے۔ الٹا سپا نے کانگریس کو چپ کرانے کے لئے رابرٹ واڈرا، اشوک کھیمکا معاملے کی یاد کرادی۔ مندر ۔ مسجد کے نام پر زمین پر ناجائز قبضے اور بڑھتی تعمیرات کے سلسلے کوروکنے کے لئے سپریم کورٹ کئی بار ریاستی سرکار کو کارروائی کی ہدایت دے چکی ہے۔ درگا شکتی نے جو کیا وہ سپریم کورٹ کی اس ہدایت کے بھی مطابق تھا ۔ اس لئے معاملہ ویسا نہیں جیسا سماجوادی پارٹی اور اکھلیش سرکار دکھانا چاہتی ہے۔ معاملہ قاعدوں اور ضابطوں کو ایمانداری سے لاگو کرنے کا بھی ہے۔
(انل نریندر)

تین لڑکیوں کو 10برس تک یرغمال بنا نے والے آبروریزکو ایک ہزار برس کی قید

امریکہ کی ریاست اوہیو میں تین لڑکیوں کو10 برس تک یرغمال بنا کر جنسی استحصال کرنے والے ایک آدمی ایریل کاسترو کو عمر قید اور ایک ہزار سال کی مزید قید کی سزا دی گئی ہے۔ اسے پیرول پر چھوڑنے کی اجازت نہیں ملی ہے۔ کلو لینڈ کے ایریل کاسترو نے تین لڑکیوں مشیل نائٹ32 سال، اومانڈا بیری27، اور جینا ڈی جی ایس23 سال کو 10 سال تک اپنے گھر میں زنجیروں میں باندھ کر قید رکھا ہوا تھا۔ اس جہنمی اذیت کو سہنے کو مجبور تینوں لڑکیوں کے ساتھ کاسترو نے کئی بار بدفعلی کی تھی۔ اس پر الزام ہے کہ ایک یرغمال لڑکی کا زبردستی اسقاط حمل بھی کرایا۔اومانڈا نے یرغمال رہنے کے دوران ہی ایک بچے کو جنم دیا تھا۔ اومانڈا ہی اس کے چنگل سے بچ کر بھاگی تھی اور آس پاس کے لوگوں کی توجہ اس گھناؤنے جرائم کی طرف مبذول کرائی گئی تھی۔ ایریل پر لڑکیوں کر یرغمال بنا کر رکھنے اور بدفعلی کرنے کے علاوہ 100 دیگر الزامات بھی لگائے گئے تھے۔ سماعت کے دوران اس نے کبھی بھی اپنا گناہ قبول نہیں کیا اور خود کو ذہنی طور سے کمزور ثابت کرنے کی کوشش میں لگا رہا۔ معاملے کی سماعت کررہے جج مائیکل روسو نے اسے یہ سزا سنائی۔ جج نے کہا کہ دوسروں کو غلام بناکررکھنے والوں کے لئے اس دنیا میں کوئی جگہ نہیں ہے۔ اس کیس کی سماعت کے دوران ایریل نے یہ دلیل دی کے اس نے کسی کو یرغمال نہیں بنایا اور سیکس کرنے میں لڑکیوں کی رضامندی تھی ، ان کی مرضی کے بغیر اس نے کسی سے تعلق نہیں بنایا۔ 53 سالہ ایریل نے اپنے بچاؤ میں کہا میں کوئی شیطان نہیں ہوں، میں ایک عام آدمی ہوں۔ بس میرا دماغ تھوڑا کمزور ہے۔ میں بہک جاتاہوں۔ میں خود سے ہی یہ سوال پوچھ رہا ہوں کہ میں نے ایسا کیوں کیا۔ ایریل نے 2002ء سے2004 ء کے دوران ان لڑکیوں کو یرغمال بنایا۔ پہلی شکار بنی لڑکی کو ایک پلا دینے اور دوسری کو اپنی بیٹی سے ملوانے کے بہانے گھر لے گیا تھا۔ ایریل کی قید میں مشیل نائٹ نے اپنی ساری زندگی کے بارے میں عدالت کو بتایا کہ کس طرح ایریل ہر ایتوار کو چرچ جاتا اور وہاں سے لوٹ کر انہیں ٹارچر کرتا تھا۔ ایریل کے خلاف گواہی دینے صرف مشیل ہی عدالت پہنچی تھی۔ ایریل کی سزا پر رائے زنی کرتے ہوئے اس نے ایریل سے کہا میں نے اپنے 11 سال جہنم میں بتائے ہیں۔ اب تمہاری باری ہے۔ تمام زندگی جہنم میں گزارنے کی۔ تمہیں مرتے دم تک جہنم کی سزا بھگتنی ہوگی۔ میں ان 11 برسوں میں کیا ہوا اس سے متاثر نہیں ہوئی اور زندہ رہوں گی ، تم اب ہر دن تھوڑا تھوڑا مرو گے۔ عدالت میں سماعت کے دوران ایریل کے گھر کا ماڈل رکھاتھا جسے دیکھ کرمشیل نے بتایا کس طرح انہیں کھڑکی دروازوں میں تالا لگا کر زنجیروں میں باندھ کر رکھا جاتا تھا۔ مانڈہ کے ساتھ پہلی بار اس گھر میں داخل ہوئی مہلا پولیس باربرا جانسن نے بتایا جب وہ اندر گئی تو انہوں نے اپنے چہرے پرٹارچ جلا کر دونوں عورتوں کو دکھایا کے وہ پولیس والی ہیں اور انہیں ڈرنے کی کوئی ضرورت نہیں ہے۔ معاملے کی جانچ کرنے والی اسپیشل ایجنٹ نے عدالت کو بتایا کہ ایریل کئی بار بدفعلی کرنے کے بعد متاثرہ عورتوں کو پیسے بھی دیتا تھا اور جب وہ مال سے کچھ سامان مانگا چاہتی تو وہ ان سے وہ پیسے واپس لے لیتا تھا۔ اس نے مانڈا کی بچی کے جنم کے فوراً بعد ڈلیوری کرنے والی عورتوں کو بھی نہیں چھوڑا اور ان سے بھی ریپ کیا۔
(انل نریندر)

08 اگست 2013

ایک طرف چین اور دوسری طرف پاکستان کیا یہ محض اتفاق ہے؟

کیا اسے محض اتفاق ہی کہا جائے گا کہ ادھر سرحد پر گشت لگا رہے ہمارے جوانوں کا راستہ چینی فوجیوں نے روک لیا اور انہیں واپس لوٹنے پرمجبور کردیا ۔ اب کشمیر میں پاکستانی فوجیوں نے ہمارے علاقے میں گھس کر سرحد کی نگرانی کررہے پانچ ہندوستانی جوانوں کو موت کے گھاٹ اتار دیا۔ اس سے ٹھیک پہلے افغانستان کے جلال آباد شہر میں پاکستانی خفیہ ایجنسی آئی ایس آئی کے اشارے پر دہشت گردوں نے ہمارے قونصل خانے پر بمدھماکہ کیا ، کیا یہ بھی اتفاق ہے۔ اگر پاکستان کے کسی نئے پلان کا حصہ ہے تو یہ معاملہ مزید سنگین بن جاتا ہے۔ جموں وکشمیر میں پاک فوج اور دہشت گردوں نے پانچ فوجیوں کا قتل وہ بھی ہندوستانی سر زمین پر کرکے جتا دیا ہے کہ آنے والے وقت میں سرحد میں رنگ میں بھنگ ہونے والا ہے۔پچھلے کچھ دنوں سے پاکستانی فوج مسلسل اکسانے والی کارروائی کررہی ہے۔ پیر کو آدھی رات کے بعد جموں و کشمیر کے پونچھ سیکٹر میں واقع کنٹرول لائن سے لگے علاقے میں واقع سرلا چوک پر پاکستانی فوجیوں نے گھات لگاکر اندھا دھند فائرنگ کردی۔ پاک فوجیوں کی اس ہمت اور اکسانے والی کارروائی میں بہار ریجمنٹ 21 کے ایک صوبے دار اور چار جوان شہید ہوگئے۔ ہماری فوجی ٹکڑی چکاداباغ چوکی سے نارتھ کی سمت میں گشت کے لئے نکلی کے پاکستانی بارڈر کے پاس ٹیم کے ایک 16-18 ممبروں نے سرحد پار کرکے ہندوستانی سرحد میں سوا دو بجے ہمارٹکڑی پر حملہ کردیا۔بھارتیہ جوانوں کو تین طرف سے گھیر کر حملہ بولا گیا۔ اسی برس 8 جنوری کو 2 ہندوستانی فوجیوں کو قتل کردیا گیا تھا ان میں سے ایک فوجی کا سر قلم کرکے لے گئے تھے۔ بھارت ۔پاک کے درمیان2003ء میں کنٹرول لائن پر جنگ بندی کا سمجھوتہ ہوا تھا اسکے بعد سے 2010ء میں 44 باراور2011ء میں 51 بار ، 2012ء میں9 بار اور اس سال اب تک37 بار پاکستان سرحدی سمجھوتے کی خلاف ورزی کرچکا ہے۔ 2010ء سے2012 ء کے درمیان تقریباً 1 ہزار بار دہشت گردوں کی گھس پیٹھ کی کوششیں ہوئیں۔ اس دوران ہندوستانی فوجوں نے 160 دہشت گردوں کو مارگرایا۔ آج بھی پاکستان و پاکستانی مقبوضہ کشمیر میں42 دہشت گردی کے تربیتی کیمپ چل رہے ہیں۔ کل ملاکرہم یہ کہہ سکتے ہیں کہ ہماری ساری کوششوں کے باوجود پاکستان اپنی حرکتوں سے باز نہیں آرہا ہے۔ اس کے پیچھے وجہ کچھ بھی رہی ہو مگر یہ اچانک شروع ہوئے سلسلے کو قبول نہیں کیا جاسکتا۔ بدقسمتی سے پاکستان اس لئے نہیں باز آرہا ہے کہ بھارت سرکار نے پاکستان کے تئیں حد سے زیادہ ٹال مٹول رویہ اپنایا ہوا ہے۔ سرکار بڑی ڈھٹائی سے مان رہی ہے کہ اس سال گھس پیٹھ کے واقعات دوگنی ہوئے ہیں اورجنگ بندی کی خلاف ورزی خطرناک ہوتی جارہی ہے۔ یہ دونوں واقعات ایک دوسرے سے جڑے ہوئے ہیں کیونکہ گھس پیٹھ سے ہمارے فوجیوں کی توجہ بٹانے کے لئے پاکستانی فوجی بھاری فائرنگ کررہے ہیں اورجنگ بندی توڑتے ہیں۔ پاکستان میں فوج اور دہشت گردوں کے رشتوں کو دیکھتے ہوئے ہمارے وزیر دفاع اے۔کے۔انٹونی کا پارلیمنٹ کے سامنے یہ کہنا کوئی مطلب نہیں رکھتا کے حملہ آور اصل میں پاکستانی فوج کی وردی میں آئے تھے جو آتنکی تھے۔ تعجب نہیں کہ پاکستان نے اپنے بیان میں ایسے واقعے سے انکار کردیا ہے۔ انٹونی کے بیان سے ایک بار پھر بھارت سرکار کی ٹال مٹول والی پالیسی سامنے آگئی ہے۔ ہم کسی بھی طرح کی جوابی کارروائی کرنے میں محض ناکام ثابت ہورہے ہیں بلکہ پاکستان میں بھارت کو کمزور اور بزدل کھلے عام طور پر کہا جارہا ہے جو ڈر کے مارے کوئی جوابی کارروائی نہیں کرسکتا۔ ادھرچین کی سرحد پر سینہ زوری ادھر پاکستانی سرحد پر کھلے عام حملہ کہیں ان دونوں مورچوں پر ہمیں گھیرنے کی کوئی خطرناک کھچڑی تو نہیں پک رہی ہے؟ پاکستان میں پچھلے دنوں چناؤ میں اچھا خاصہ مینڈینٹ پاکر نواز شریف وزیر اعظم بنیں ہیں اور دونوں دیشوں میں نئی امید پیدا ہوئی تھی کہ شاید اب دونوں دیشوں کے آپسی تعلقات بہتر ہوں کیا ہم نواز شریف پر صرف اس لئے بھروسہ کر ہاتھ پرہاتھ رکھ کر بیٹھے رہیں جوکہ امن اور دوستی کی با تیں کررہے ہیں؟بھارت سرکار کو یہ نہیں بھولنا چاہئے کے کارگل گھس پیٹھ کے وقت بھی نواز شریف کے ہاتھوں میں اقتدار تھا اور باگ ڈور تھی اور ایسے میں کئی حقائق سامنے آچکے ہیں جو اس طرف اشارہ کرتے ہیں کہ انہیں اس گھس پیٹھ کی پوری جانکاری تھی۔ سچ کیا ہے پتہ نہیں لیکن ہم بار بار دھوکہ کھانے کو تیار نہیں ہیں۔ اب تو ساری دنیا جان گئی ہے کہ نواز شریف بھی پاک فوج اور دہشت گردانہ تنظیموں کے اشاروں پر ہی چلیں گے اور یہ بھی کسی سے پوشیدہ نہیں رہ گیا ہے کہ پاکستانی فوج اور اس کی آئی ایس آئی لشکر طیبہ اور جیش محمد جیسی دہشت گرد تنظیموں کے سہارے بھارت کے خلاف ایک درپردہ جنگ چھڑی ہوئی ہے۔ ایسا لگتا ہے کہ بھارت سرکار کو ابھی بھی اس کی زیادہ فکر ہے کہ پاکستان سے کیسے رشتے بحال ہوں؟ اگر بھارت سرکار پاکستان کے سلسلے میں اپنی پالیسی نہیں بدلتی اور کچھ سختی نہیں دکھاتی تو بے عزتی کے ایسے لمحوں سے بچنا مشکل نظر آتا ہے۔
(انل نریندر)

بھارتیہ کرکٹ پر مافیا کنٹرول بورڈ!

ہمارے دیش میں کرکٹ کو لیکر عجیب وغریب صورتحال بنی ہوئی ہے۔ ایک طرف ٹیم انڈین انٹرنیشنل کرکٹ میں جھنڈے گاڑھ رہی ہے تو وہیں کرکٹ مافیا کی چھتر چھایا میں کرکٹ میچ فکسنگ کی خبریں زوروں پر ہیں۔ زمبابوے میں وراٹھ کوہلی کی ٹیم نے پہلی بار غیرملکی سرزمین پر 5-0 سے سیریز جیت لی ہے۔ٹھیک اسی وقت جب یہ میچ چل رہے تھے دہلی پولیس 6 ہزار صفحوں کی لمبی چوڑی چارج شیٹ داخل کررہی تھی۔ اس میچ فکسنگ معاملے میں دہلی پولیس نے39 ملزم بنائے ہیں جن میں داؤد ابراہیم جیسے خطرناک ڈان کے درمیان سری سنت سمیت تین ایسے کرکٹر شامل ہیں جو راجستھان رائلز کی طرف سے آئی پی ایل کھیلتے ہیں۔ دہلی پولیس نے کہا کہ یہ وہی مافیا ہے جو عرصے سے بھارت کی بربادی کے لئے سازشوں کو رچتا آرہا ہے۔ اب دیکھئے ایسے خطرناک مافیا سنڈی کیٹ کی کٹھ پتلی بن کر کرکٹ اور دیش کا ستیاناس کرنے والے تین کرکٹر جس راجستھان رائلز ٹیم سے جڑے ہوئے ہیں اس ٹیم کو پاک صاف بتانے کی لئے کیسی بازی گری کی گئی ہے۔ کرکٹ کنٹرول بورڈ کی ذمہ داری یا پرائیویٹ لمیٹڈ کمپنی کی طرح چلانے والے بی سی سی آئی کے چیئرمین این سری نواسن ،چنئی سپرکنگ بھی الزامات کے گھیرے میں تھی۔ خود این سری نواسن کے داماد میپئن اس ٹیم کے سروے سروا ہوا کرتے تھے جن پر سٹے بازی کے الزامات تھے انہیں کلین چٹ دینے کے لئے آناً فاناً میں اپنی من چاہی کمیٹی بنا دی گئی جس نے محض چند گھنٹوں کے اندر ہی دنوں ٹیموں کو پاک صاف ہونے کا سرٹیفکیٹ دے دیا۔ دلچسپ بات یہ رہی کہ 24 گھنٹے کے اندر ممبئی ہائی کورٹ نے نہ صرف اس سرٹیفکیٹ کو غلط بتا دیا بلکہ کمیٹی کی تشکیل ہی ناجائز اور غیر آئینی قرار دے دی۔ عدالت خود حیران تھی کہ بی سی سی آئی نے اپنے ہی قواعدوں کی تلانجلی کیسے دی اور کیسے کمیٹی بنا دی۔ خاص کر تب دہلی اور ممبئی پولیس کی تحقیقات جاری تھی لیکن اس کے برعکس فیصلے سے بھی سری نواسن کو کوئی فرق نہیں پڑا اور انہیں عہدے پر پھرسے فائض ہونے کی خاطرسارے قواعد اور روایت کو طاق کر رکھ کر ورکنگ کمیٹی کی خصوصی میٹنگ بلا لی اور اس کا ایک ایجنڈا تھا این سری نواسن کو چیئرمین کے عہدے پر دوبارہ سے بٹھانا۔ ورکنگ کمیٹی میں جم کر مخالفت ہوئی اور کچھ ممبروں نے استعفیٰ دینے تک کی بات کہہ دی۔ ان کی دلیل تھی کہ جس طرح دوممبران کے پینل نے جانچ میں این سری نواسن کو الزام سے بری کردیا اس سے جانچ کا پورا عمل شبے کے دائرے میں آجاتا ہے۔ اسی طرح گوروناتھ میپئن کو جس طرح کلین چٹ دی گئی اس سے بھی سوال کھڑے ہوتے ہیں۔ جب ہائی کورٹ نے کمی کو ہی ناجائز اور غیر آئینی قرار دیا تو ایسے میں سری نواسن کا چیئرمین بننا اور اس حیثیت سے میٹنگ بلانا بغاوت کے حالات پیدا کرنے جیسا ہے۔ ویسے یہ معاملہ این سری نواسن ، جگموہن ڈالمیہ کے درمیان کھینچ تان کا بھی لگتا ہے۔ انہی سب کو دیکھتے ہوئے ڈالمیہ کو انترم چیئرمین کی شکل میں کام کرتے رہنے کے لئے کہا گیا ہے۔ بھارتیہ کرکٹ کے مستقبل کے لئے ایک اچھے صاف ستھرے بورڈ کا ہونا اتنا ہی ضروری ہے جتنا اس کرکٹ مافیا سے جان چھڑانا۔
(انل نریندر)

07 اگست 2013

مرکزی سرکار کا سپریم کورٹ میں حلف نامہ، طوطے کو پنجرے میں رہنے دو

مرکزی سرکار نے سی بی آئی کو زیادہ مختاری دینے پر سپریم کورٹ میں کہا ہے کہ طوطے کو پنجرے میں ہیں رہنے دو اور طوطے کی نگرانی ضروری ہے۔ عدالت میں دائر حلف نامے میں مرکزی سرکار نے جانچ ایجنسی کوزیادہ مختاری دینے کی مخالفت کرتے ہوئے جو دلیل دی ہے وہ عجیب و غریب ہے۔ مرکزی سرکار نے کہا ہے کہ بغیرجوابدہی کے سی بی آئی ڈائریکٹر کی میعاد بے لگام ہوسکتی ہے۔سی بی آئی کے افسروں کے خلاف موٹی رقموں کی وصولی اور جانچ میں دھاندلی کی سنگین شکاتیں ملتی رہتی ہیں اس لئے سی بی آئی کی جوابدہی ضروری ہے۔ مرکزی سرکار نے سی بی آئی کے ڈائریکٹر کی کم از کم میعاد 3 سال کرنے کی سی بی آئی کی تجویز کو نظرانداز کرتے ہوئے کہا بغیر کسی کنٹرول اور نگرانی کے سب سے زیادہ طاقتور ڈائریکٹر کے بے لگام ہونے کا خطرہ ہے۔ مرکزی سرکار نے سپریم کورٹ میں داخل 22 صفحات کے حلف نامے میں کہا حقیقت میں کنٹرول اور توازن کے بغیر سی بی آئی کے ڈائریکٹر کا سروشکتی مان ہونا وآئینی اصولوں کے مطابق نہیں ہوگا اور اس کا ہمیشہ ہی بیجا استعمال کا خطرہ بنا رہے گا اور یہ سبھی سطحوں پر اس تنظیم کے آزادانہ اور بے جھجھک ہوکر کام کرنے کیلئے صحیح نہیں ہوگا۔ کوئلہ گھوٹالے میں سی بی آئی کی جانچ میں سرکار کی مداخلت سے سپریم کورٹ نے دیش کی سب سے بڑی جانچ ایجنسی کی آزادی کو لیکر کارروائی شروع کی ہے۔ آزادی پرسرکار کی تجویز پر سی بی آئی کے اعتراضات کے جواب میں مرکزی سرکار نے اپنا موقف صاف کردیا ہے۔ دیش کی سب سے بڑی جانچ ایجنسی سی بی آئی کی آزادی کے سلسلے میں کوئی بھی فیصلہ سپریم کورٹ کو لینا ہے۔ یہ بات سی بی آئی ڈائریکٹر رنجیت سنہا نے ایتوار کو کہی۔ سی بی آئی آزادی کی مانگ کے سوال سے منشا ظاہر ہوگئی ہے کہ وہ اسے کئی ماسٹروں کے ماتحت رکھنا چاہتی ہے۔ سرکار کے ذریعے سپریم کورٹ میں داخل حلف نامے کو دیکھنے سے تو کم سے کم ایسا ہی لگتا ہے۔ سرکار نے سی بی آئی کے مالی اختیارات بڑھانے، خالی عہدوں کو بھرنے، جیسے کئی اشوز پر بندش جیسے الفاظ کا استعمال یہ بتاتا ہے کہ وہ جانچ ایجنسی کو اپنے چنگل سے نکلنے نہیں دینا چاہتی کے طوطا پنجرے میں ہی رہے۔ ایسے میں اس جانچ ایجنسی کا آزاد ہونا دور کی بات لگتی ہے۔ سی بی آئی کے اعلی حکام سرکار کے قدم اور حلف نامے سے بیحد ناراض ہیں۔ ان کا خیال ہے کہ سرکار نے جو حلف نامہ دیا ہے اس سے تو صافہوگیا ہے کہ جانچ کا کام سرکار کی نگرانی میں ہی ہو۔ سرکاری حلف نامے میں جس چیز پر زیادہ زور دینے کی کوشش کی گئی ہے سرکار کس طرح سی بی آئی کے طریق�ۂ کارکو آزادانہ منصفانہ بنانے کی کوشش کررہی ہے۔ اس نے سی بی آئی کے اوپر کچھ اور ماسٹر بٹھانے کی منشا سپریم کورٹ میں ظاہر کردی ہے۔ جانچ ایجنسی کا خیال ہے کہ وہ آزاد اور منصفانہ جانچ نہیں کرسکتی کیونکہ اس پر جوابدہی کمیٹی ہوگی۔ یعنی اس کے اوپر ایک اور ماسٹر ہوگا لہٰذا ان کو خوش کرنے میں جانچ افسر لگے رہیں گے۔ ذرائع کے مطابق سی بی آئی اگلی سماعت میں سرکار کے قدموں کی مخالفت کرے گی اور سپریم کورٹ کو یہ بتائے گی کہ اس کے ڈائریکٹر کو نہ تو مالی اختیار ملا اور نہ ہی کسی کی تقرری کا ۔
(انل نریندر)

افغانستان میں بھارت کو خطرے کی ایک اور جھلک!

جیسے جیسے امریکہ کاافغانستان سے نکلنے کا وقت قریب آرہا ہے طالبان مضبوط ہوتا جارہا ہے اور بھارت کا افغانستان میں رہنے کا خطرہ بڑھتا جارہا ہے۔ پاکستان اور طالبان معمولاً افغانستان کے نشانے پر بھارت رہے گا۔ افغانستان میں بھارت کے کئی ترقیاتی پروجیکٹ چل رہے ہیں اور پاکستان قطعی نہیں چاہے گا کہ یہ لمبے چلیں اور بھارت کا اثر اس علاقے میں بنا رہے۔ امریکہ کے ہٹنے کے بعد کیا نظارہ ہوتا ہے اس کا تازہ نمونہ ہمارے سامنے آگیا ہے۔ افغانستان کے جلال آباد شہر میں بھارت کے تجارتی قونصل خانے کو نشانہ بنا کر فدائی حملہ کیا گیا۔ اس حملے میں12 لوگوں کی موت ہوگئی 24 دیگر زخمی ہوگئے۔ مرنے والوں میں تین حملہ آور سمیت 8 بچے شامل ہیں۔ ہندوستانی قونصل خانے کے سبھی ہندوستانی ملازم محفوظ ہیں۔ مانا جاتا ہے بھارت سرکار کو اپنے قونصل خانے سمیت تمام سفارتخانوں پر حملے کا اندیشہ تھا اور اس لئے پچھلے ہفتے سکیورٹی حکام نے کابل کا دورہ کیا تھا۔ خاص بات یہ ہے کہ یہ حملہ ایسے وقت ہوا ہے جب امریکہ نے القاعدہ کے امکانی حملوں کے پیش نظر نہ صرف الرٹ جاری کیا بلکہ مشرق وسطیٰ کے اپنے سفارتخانوں کو بھی ایک دن کے لئے بند رکھنے کا اعلان کیا۔ جرمنی اور برطانیہ نے بھی خطرے کو دیکھتے ہوے یمن میں واقع اپنے سفارتخانوں کو ایتوار اور پیرکو بندرکھنے کا اعلان کیا ہے۔ یہ حملہ اس وقت کیا گیا جب بہت سے لوگ ویزا کے لئے درخواست دینے کیلئے لائن میں کھڑے تھے۔ جلال آباد میں بھارتیہ قونصل خانے میں ہوئے اس حملے میں پتہ چلا ہے کہ اس میں شامل فدائی حملہ آور پاکستان کے شہری تھے ۔حملہ منظم منصوبے کے تحت مقامی لوگوں کی مددسے کیاگیا تھا۔حالانکہ حکومت ہند نے پاکستان کا نام نہیں لیا ہے لیکن اشاروں میں وزارت خارجہ نے اس طرف اشارہ ضرور کردیا۔ وزارت کا کہنا ہے افغانستان سرحدکے پاس بسے کچھ ایسے گروپ ہیں جو وہاں سلامتی اور امن کو تباہ کرنا چاہتے ہیں۔ ظاہر سی بات ہے کہ یہ حملہ پاکستانی خفیہ ایجنسی کے ہی اشارے پر ہوا ہے۔ اسکے ثبوت بھارت سرکار کے پاس بھی ہیں اور امریکہ کے پاس بھی۔ حیرت ناک بات یہ ہے کہ آئی ایس آئی کی جانب سے طالبان کو ہندوستانی سفارتخانے پرحملے کی ہدایت دئے جانے کی بات سے واقف ہونے کے باوجود نہ تو امریکہ اس حملے کو روک سکا اور نہ ہی بھارت۔ آنے والے دن بھی زیادہ خطرناک ہوسکتے ہیں کیونکہ امریکہ اب گلے سال وہاں سے نکلنے کے لئے طالبان تک سے سمجھوتہ کرنے کے لئے بے چین ہے۔اگر امریکہ طالبان سے سمجھوتہ کرکے اور اس کے بغیر اگلے برس افغانستان چھوڑ دیتا ہے تو بھارت کے لئے وہاں اپنی موجودگی بنائے رکھنا بہت مشکل ہوسکتا ہے۔ اگر ایسا ہوا تو نہ صرف افغانستان کی باز آبادکاری میں خرچ کئے گئے اربوں روپے برباد ہوجائیں گے بلکہ بھارت کے لئے بھی خطرہ بڑھ جائے گا۔ 2014ء میں بھارت میں لوک سبھا چناؤ ہونے ہیں اگر یوپی اے سرکار پھر بنتی ہے تو بھارت کے لئے خطرہ اور بڑھ جائے گا کیونکہ یو پی اے سرکار کا آتنک واد سے لڑنے کا پرانا ریکارڈ بہت حوصلہ افزا نہیں ہے۔ آنے والے مہینے امریکہ اور بھارت کے لئے چیلنج بھرے ہیں۔
(انل نریندر)

06 اگست 2013

भाजपा के दिग्विजय शत्रुघ्न सिन्हा

समझ नहीं आ रहा कि हमारे शॉटगन भाई यानि शत्रु भाई को क्या हो गया है। पिछले कुछ दिनों से शत्रुघ्न सिन्हा अजीब-अजीब से बयान दे रहे हैं। लगातार बयानबाजी कर रहे शत्रुघ्न सिन्हा को अनुशासन की सीख देते हुए भाजपा ने उनकी तुलना कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से की है। पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने कहा कि उन दोनों नेताओं की सबसे बड़ी सजा यही है कि उनके बयानों को कोई भाव नहीं देता। उमा ने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस पार्टी कई बार दिग्विजय के बयानों से उनकी निजी राय बताकर खुद को अलग कर लेती है, उसी तरह भाजपा भी शत्रुघ्न सिन्हा के बयानों को अपना नहीं मानती है। उमा भारती ने कहा कि सिन्हा द्वारा किसी की प्रशंसा या आलोचना का कोई महत्व नहीं रह गया है। पिछले कुछ दिनों से शत्रु के बयानों में दो पात्र एक समान रहे हैं। पहले हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और दूसरे हैं भाजपा के भावी प्रधानमंत्री व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी। शत्रु बार-बार यह कह चुके हैं कि वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सबसे अच्छे विकल्प होंगे। पार्टी अध्यक्ष द्वारा नरेन्द्र मोदी को देश का सबसे लोकप्रिय नेता बताने संबंधी बयान की परोक्ष खिंचाई करते हुए शत्रु भाई ने यह भी कहा कि अगर  लोकप्रियता ही मापदंड होता तो देश के राष्ट्रपति अमिताभ बच्चन को होना चाहिए। यह अफसोस की बात है कि जिस पार्टी को शत्रुघ्न सिन्हा ने वर्षों तक सींचा संवारा आज उसी के हितों की भी वह परवाह नहीं कर रहे। नरेन्द्र मोदी का विरोध हम समझ सकते हैं। भाजपा में बहुत से नेता हैं जो नरेन्द्र मोदी को भावी पीएम प्रोजेक्ट करने के खिलाफ हैं पर वह ऐसा कोई काम नहीं करते जिससे पार्टी हितों पर आघात लगा पर शत्रु ने वह सीमा भी लांघ दी है। पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा ने ऐसा बयान दे दिया जिसकी पार्टी में प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। पटना साहब से भाजपा के सांसद शत्रुघ्न ने पटना के जय प्रकाश नारायण हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने के काबिल हैं। वह आज देश के कुछ अच्छे और सफल मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अंतत पार्टी की ओर से चुने जाने और चुनाव में पर्याप्त मत हासिल करने पर ही कोई प्रधानमंत्री बनता है। सिन्हा ने कहा कि वह कुमार के साथ अच्छे निजी संबंधों के आधार पर राजग और जद (यू) के बीच पुल बनाने की कोशिश करेंगे। शत्रु के इस बयान को लेकर यह भी कहा जा सकता है कि पार्टी हाई कमान और नरेन्द्र मोदी पर सीधा हमला है। पिछले हफ्ते शत्रु और नीतीश की मुलाकात और नीतीश द्वारा शत्रुघ्न का गुणगान भी खूब चर्चा में रहा और इस जुगलबंदी के निहितार्थ भी खोजे जाने लगे। इस बीच सिन्हा का नीतीश में भावी प्रधानमंत्री का अक्स देखना कुछ को पार्टी लाइन से अलग दिख रहा है। इसीलिए इस पर सफाई मांगने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने तक की बातें हो रही हैं। इसके पीछे बिहार की स्थानीय राजनीति भी एक कारण हो सकता है। बिहार के भाजपा नेता सुशील मोदी और शत्रुघ्न के आंतरिक तौर पर संबंध अलग-अलग हैं और अलग ध्रुवों पर खड़े हैं। वैसे भी शत्रु को विवादों में रहने की आदत-सी हो गई है चाहे पटना से लोकसभा टिकट का मामला हो या फिर नरेन्द्र मोदी को पीएम प्रोजेक्ट करने का हो।
                                                                                                                                      -अनिल नरेन्द्र
 

उत्तराखंड में तबाही का मंजर थमने का नाम नहीं ले रहा है

उत्तराखंड में भोले बाबा और धारी देवी का प्रकोप थमने का नाम ही नहीं ले रहा। उत्तराखंड में लगभग सभी स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश जारी है। लगातार बारिश जारी रहने से राज्य की सभी प्रमुख नदियां, गंगा, यमुना, सरयू, काली, गौरी और गौला का जलस्तर बढ़ रहा है। राहत कार्यों के सिलसिले में केदारनाथ गए एक एसडीएम अजय अरोड़ा का इस दौरान अत्यंत दुखी घटना का पता चला। अल्मोड़ा में तैनात एसडीएम अजय अरोड़ा (45) आपदा के बाद से गुप्तकाशी क्षेत्र में तैनात थे। अरोड़ा बुधवार सुबह ही हेलीकाप्टर से केदारनाथ पहुंचे थे। अपराह्न 3.20 बजे वह साथियों के साथ केदारनाथ मंदिर से वापस कैम्प की तरफ लौट रहे थे। कैम्प और मंदिर के बीच में मंदाकिनी नदी को पार करने के लिए तख्त बांधकर अस्थायी पुल का निर्माण किया गया है। अस्थायी पुल पार करते हुए अरोड़ा का पांव फिसल गया और वह नदी में जा गिरे। साथ चल रहे लोग मदद के लिए भागे। लेकिन अरोड़ा तेज धारा में बह गए। मैंने मंदाकिनी की उस जगह तेज धारा देखी है, भयानक स्पीड है। उसमें गिर कर बचना लगभग असम्भव है। गिरते ही अरोड़ा का पता नहीं लगा कि वह गए कहां। इतने दिन बीतने के बाद भी उनका कुछ अता-पता नहीं चल सका है। उत्तरकाशी में लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटनाओं से भागीरथी फिर उफान पर है। शुक्रवार को भागीरथी के उफान से प्रसिद्ध मणिकार्णिकाघाट स्थित पौराणिक मणिकार्णिकेश्वर मंदिर भी भागीरथी की तेज जलधारा में बह गया है। दूसरी ओर डुंडा प्रखंड के नाकुरी स्थित शिव मंदिर का एक हिस्सा भी नदी के टकराव से ढक गया है। शिवनगरी उत्तरकाशी में पौराणिक मंदिरों का महत्व धार्मिक परम्पराओं में खासा स्थान रखता है। मणिकार्णिकेश्वर मंदिर पिछले वर्ष आयी दैवीय आपदा से भागीरथी की चपेट में था। मंदिर की बुनियाद इतनी मजबूत थी कि भागीरथी के जल स्तर के बावजूद मंदिर पर कोई खरोच तक नहीं आई लेकिन लगातार बादल फटने की घटनाओं के सामने भागीरथी का जल स्तर काफी ऊंचा होने के कारण यह मंदिर आखिरकार बह गया। ताजा खबर के अनुसार केदारनाथ धाम में 11 सितम्बर को सर्वार्थ सिद्धी अमृत योग के दिन फिर से पूजा शुरू हो जाएगी। शंकराचार्य, रावल, स्थानीय तीर्थ पुरोहित व संत समाज ने इस पर अपनी सहमति जता दी है। केदारनाथ में पूजा कराने को लेकर गत शुक्रवार को देहरादून में सचिवालय में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह और सभामंडप में मलबे की सफाई हो चुकी है। इसके दरवाजे भी लगाए जा चुके हैं। नदी की मूर्ति के पास चबूतरा भी बनाया जा चुका है। बहुगुणा ने कहा कि केदारनाथ मंदिर में पूजा शुरू कराने के साथ ही इस काम में लगे लोगों की सुरक्षा भी सुनियोजित की जानी है। उन्होंने केदारनाथ में लोहे का पुल और रेलिंग लगवाने के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देश दिया। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी दिलीप जावलकर को केदारनाथ में दो महीने का राशन व अन्य जरूरी सामान भिजवाने को कहा ताकि वहां मंदिर समिति के पदाधिकारियों, पुरोहित और पुलिस व प्रशासन के लोगों को काम करने में अड़चने न आएं। बैठक में मौजूद सभी संतों व धार्मिक नेता एकमत थे कि 11 सितम्बर को सर्वार्थ सिद्धी अमृत योग बन रहा है। उस दिन पूजा करने में किसी को कोई आपत्ति नहीं है। जय बाबा केदारनाथ।


اتراکھنڈ میں تباہی کا منظر رکنے کا نام نہیں لے رہا ہے!

اتراکھنڈ میں بھولے بابا اور دھاری دیوی کا قہر رکنے کا نام نہیں لے رہا ہے۔ اتراکھنڈ میں تقریباً سبھی مقامات پر رک رک کر بارش جاری ہے۔ بارش سے ریاست کی سبھی بڑی ندیاں گنگا، جمنا، سرجو ، کالی، گوریئے،گولا کی آبی سطح مسلسل بڑھ رہی ہے جس سے راحت رسانی کے سلسل میں کیدارناتھ گئے ایک ایس ڈی ایم اجے اروڑہ کے بہہ جانے کے انتہائی افسوسناک واقعہ کی خبر ملی ہے۔ الموڑہ میں تعینات ایس ڈی ایم اجے اروڑہ 45 سال قدرتی آفت کے بعد سے گپت کاشی میں تعینات تھے۔ اروڑہ بدھوار کی صبح ہیلی کاپٹر سے کیدارناتھ پہنچے تھے اور دوپہر تین بجے وہ اپنے ساتھیوں کے ساتھ کیدارناتھ مندر سے کیمپ واپس لوٹ رہے تھے۔ کیمپ اور مندر کے درمیان منداکنی ندی کو پار کرنے کے لئے تخت باندھ کر ایک عارضی پل بنایا گیا۔ اس پل کو پارکرتے ہوئے اروڑہ کا پاؤں پھسل گیا اور وہ ندی میں جاگرے۔ ساتھ چل رہے لوگ مدد کے لئے بھاگے لیکن اروڑہ پانی کی تیز دھار میں بہہ گئے۔ میں نے منداکنی ندی کی اس تیز دھار کو دیکھا ہے، خطرناک رفتار ہے۔ اس میں گر کربچنا ناممکن ہے۔ گرتے ہی شری اروڑہ کا پتہ نہیں لگا وہ بہہ کر کہاں گئے اتنے دن گزرنے کے بعد بھی ان کی لاش کا پتہ نہیں چلا۔ اترکاشی میں مسلسل ہورہی بارش اور بادل پھٹنے کے واقعات سے بھاگیرتی ندی طغیانی پر ہے اس میں پانی کی تیز رفتار میں منی کیشور مندر بھی بہہ گیا۔دوسری طرف پرکھنڈ کے ناگپوری میں واقع شیو مندر کا ایک حصہ بھی ندی کے ٹکراؤ میں بہہ گیا۔ شیو نگری اترکاشی کے قدیمی مندروں کی اہمیت اور مذہبی روایات میں خاص مقام رکھتا ہے۔ کیشور مندر پچھلے برس آئی قدرتی آفت سے بھاگیرتی کی چپیٹ میں تھا۔ مندر کی بنیاد اتنی مضبوط تھی کہ بھگیرتی ندی کی آبی سطح کے باوجود مندر میں کوئی کھرونچ تک نہیں آئی لیکن لگتار بادل پھٹنے کے واقعات کے سامنے بھاگیرتی ندی کی آبی سطح کافی اونچی ہونے کے سبب آخر کار مندر بہہ گیا۔ تازہ خبر کے مطابق کیدارناتھ دھام میں 11 ستمبر کو سیوارتھ سدھی امرت یوگ کے دن پھر سے پوجا شروع ہوجائے گی۔ شنکر آچاریہ،راول، مقامی تیرتھ پروہت و سنت سماج نے اس پر اپنی رضامندی جتادی ہے۔ کیدارناتھ میں پوجا کرنے کولیکر گزشتہ جمعہ کو دہرہ دون میں واقعہ سچیوالیہ میں وزیر اعلی وجے بہوگنا کی سربراہی میں میٹنگ ہوئی جس میں تفصیل سے غور وخوض ہوا۔ وزیر اعلی نے کہا کیدارناتھ مندر کے گربھ گرہ سبھا منڈپ میں ملبے کی صفائی ہوچکی ہے اور اس کے دروازے بھی لگائے جاچکے ہیں۔ نندی کی مورتی کے پاس چبوترہ بنایا جاچکا ہے۔ بہوگنا نے کہا کیدارناتھ مندر میں پوجا شروع کرانے کے ساتھ اس کام میں لوگوں کی سلامتی بھی یقینی بنانی ہے۔ انہوں نے کیدارناتھ میں لوہے کا پل اور ریلنگ لگوانے کے لئے پی ڈبلیو ڈی کے چیف انجینئر کو ہدایت دی۔ انہوں نے ویڈیو کانفرنسنگ کے ذریعے ردرپریاگ کے ضلع مجسٹریٹ دلیپ جاولکر کو کیدارناتھ میں دو مہینے کا راشن و دیگرضروری سامان بھجوانے کو کہا تاکہ وہاں مندر کمیٹی کے عہدیدارن، پروہت ، پولیس و انتظامیہ کے لوگوں کو کام میں کوئی دقت نہ آئے۔ میٹنگ میں موجود سبھی سنتوں اور دھارمک نیتا ایک رائے تھے کے 11 ستمبر کو سروارت سدھی امرت یوگ بن رہا ہے اس دن پوجا کرنے میں کسی کو کوئی اعتراض نہیں ہے۔ جے بابا کیدارناتھ۔
(انل نریندر)

بھاجپا کے دگوجے شتروگھن سنہا!

سمجھ میں نہیں آرہا ہے کہ ہمارے شاٹ گن یعنی شترو بھائی کو کیا ہوگیا ہے۔ پچھلے کچھ دنوں سے شتروگھن سنہا عجیب و غریب بیان دے رہے ہیں۔ مسلسل بیان بازی کررہے شتروگھن سنہا کو ڈسپلن میں رہنے کی نصیحت دیتے ہوئے بھاجپا نے ان کا موازنہ کانگریس کے بڑبولے جنرل سکریٹری دگوجے سنگھ سے کیا ہے۔پارٹی کی قومی نائب صدر اوما بھارتی نے کہا کہ ان دونوں لیڈروں کی سب سے بڑی سزا یہ ہی ہے کہان کے بیانوں کو کوئی بھاؤ نہ دیاجائے۔ اوما نے کہا جس طرح سے کانگریس پارٹی کئی بار دگوجے کے بیانوں سے اپنا پلہ جھاڑتے ہوئے نجی بیان بتاتی ہے اسی طرح بھاجپا بھی شتروگھن سنہا کے بیانوں کو اپنا نہیں مانتی۔ انہوں نے کہا سنہا کے ذریعے کسی کی تعریف یا تنقید کی کوئی اہمیت نہیں رہ گئی۔ پچھلے کچھ دنوں سے شتروکے بیانوں میں دو باتیں ایک جیسی رہیں۔ پہلی بھاجپا کے سینئر لیڈر لال کرشن اڈوانی اور دوسرا ہے بھاجپا کے پی ایم انویٹنگ گجرات کے وزیر اعلی نریندر مودی۔ شترو بار بار یہ کہہ چکے ہیں کہ سینئر لیڈر ایل کے اڈوانی پارٹی کے پی ایم عہدے کے امیدوار کی شکل میں سب سے اچھے متبادل ہوں گے۔ پارٹی کے ذریعے نریندر مودی کو دیش کا سب سے مقبول لیڈر بتانے سے متعلق بیان کی درپردہ کھنچائی کرتے ہوئے شترو نے کہا کہ اگر مقبولیت کا یہ ہی پیمانہ ہوتا تو دیش کا راشٹرپتی امیتابھ بچن کو ہونا چاہئے۔ یہ عجب سی بات ہے کہ جس پارٹی کو شتروگھن سنہا نے برسوں تک سینچا ،سنوارا آج اسی کے مفادات کی وہ پرواہ نہیں کررہے۔ نریندرمودی کی مخالفت ہم سمجھ سکتے ہیں ۔بھاجپا میں بہت سے لیڈر ہیں جو نریندر مودی کو امکانی پی ایم پروجیکٹ کرنے کے خلاف ہیں لیکن ایسا کوئی کام نہیں کرتے جس سے پارٹی کے مفادات پر آنچ آئے۔ لیکن شترو نے وہ بھی حد پارکردی ہے۔
پچھلے دنوں انہوں نے ایسا بیان دیا جس کا پارٹی میں ردعمل ہونا فطری ہے۔ پٹنہ صاحب سے بھاجپا کے ایم پی شتروگھن سنہا نے جے پرکاش نارائن ہوائی اڈے پر اخبار نویسوں سے کہا کہ نتیش کمار وزیراعظم بننے کے قابل ہیں۔ وہ آج دیش کے کچھ اچھے اور کامیاب وزراء اعلی میں شامل ہیں۔ اس لئے پارٹی کی جانب سے انہیں جانے یا چناؤ میں ٹھیک ٹھاک ووٹ حاصل کرنے پر ہی کوئی پردھان منتری بنتا ہے۔ سنہا نے کہا وہ نتیش کمار کے ساتھ اچھے اور ذاتی رشتوں کی بنیاد پر این ڈی اے اور جے ڈی یو کے درمیان پل بنانے کی کوشش کریں گے۔ شترو کے اس بیان کولیکر یہ بھی کہا جاسکتا ہے کہ پارٹی ہائی کمان اور نریندر مودی پر سیدھا حملہ ہے۔ پچھلے ہفتے شترو اور نتیش کی ملاقات اورنتیش کے ذریعے شتروگھن سنہا کا گنگان بھی خوب سرخیوں میں چھایا رہا۔ اس جگل بندی کے نفع نقصان کے بارے میں پتہ لگایا جائے۔ اس درمیان سنہا کا نتیش میں امکانی وزیر اعظم کا عکس دیکھنا کچھ کو پارٹی لائن سے الگ نظر آرہا ہے اس لئے اس پر صفائی مانگنے یا ان کے خلاف کارروائی کرنے تک کی باتیں ہورہی ہیں۔ اس کے پیچھے بہار کی مقامی سیاست بھی ایک سبب ہوسکتی ہے۔ بہار کے بھاجپانیتا سشیل مودی اور شتروگھن سنہا اندرونی طور پر الگ الگ ہیں اور الگ محاذ پر کھڑے ہوئے ہیں ویسے بھی شتروکو تنازعوں میں رہنے کی عادت ہوگئی ہے چاہے پٹنہ سے لوک سبھا کے ٹکٹ کا معاملہ ہویا پھرنریندر مودی کو پی ایم پروجیکٹ کرنے کا ہو۔
(انل نریندر)

04 اگست 2013

ہم ساتھ ہیں کیونکہ ہمارا ہر تیسرا لیڈ داغی ہے!

اس حمام میں سبھی ننگے ہیں۔ میں بات کررہا ہوں ہماری سیاسی پارٹیوں کی اور ہمارے عوامی نمائندے یعنی ممبران پارلیمنٹ کی۔ انہیں اپنے مفادات کی کتنی فکر ہے یہ مانسون اجلاس سے پہلے آل پارٹی میٹنگ میں صاف ہوگیا۔ ویسے آل پارٹی میٹنگیں تو کئی ہوئیں لیکن اتفاق کبھی کبھی ہوتا ہے لیکن یہ اشو ایسا تھا کے سبھی ممبران پارلیمنٹ کو مریاداؤں ، دلیل، شفافیت سے زیادہ فکر اپنی تھی۔ انہیں اس بات کی قطعی فکر نہیں کے وہ سیاسی پارٹی کے موقف کے حق میں کھل کر کھڑے ہوں۔ اپنے آپ کو جنتا کے سامنے بے نقاب کررہے ہیں۔ اشو تھا سپریم کورٹ کا 10 جولائی کا وہ حکم جس میں جیل جانے یا سزا ہونے پر نیتاؤں کے چناؤ لڑنے پر روک لگائی گئی تھی۔ آل پارٹی میٹنگ میں عوامی مفاد کے کئی معاملے جیسے خاتون ریزرویشن، لوک پال بل، برسوں سے جن پارٹیوں کے اختلاف کے سبب لٹکے پڑے ہیں۔ وہی پارٹیاں مجرمانہ شخصیت کے حامل لیڈروں کے حق میں بغیرشرط ایک رائے سے متفق ہوگئے۔ دلیل یہ دی گئی جرائم پیشہ لیڈروں کے خلاف سپریم کورٹ کے فیصلے سے پارلیمنٹ کی سپرمیسی کو آنچ آرہی ہے۔ تلخ حقیقت تو یہ ہے موجودہ ممبر و پارلیمنٹ میں سے30 فیصدی پر مجرمانہ معاملے چل رہے ہیں۔ پارٹیاں یہ بھی دلیل دے رہی ہیں کہ اس فیصلے سے کئی لیڈروں کا مستقبل خطرے میں پڑ جائے گا۔ 4807 ممبر اسمبلی و ممبران پارلیمنٹ میں سے 1460 کے خلاف مجرمانہ مقدمے چل رہے ہیں۔ ہر پارٹی میں داغی لیڈر موجود ہیں۔ کانگریس سے21 فیصدی نیتا جیت کر آئے ہیں۔ بھاجپا میں قریب31 فیصدی داغی پارلیمنٹ و اسمبلی میں پہنچے ہیں۔ سپا پر کل 48 فیصدی ایم پی اور ممبران اسمبلی پر مقدمے چل رہے ہیں۔ بہار میں 58 فیصدی، یوپی میں 47 فیصدی داغی ممبران اسمبلی ہیں۔ عوامی نمائندگان قانون کی اس دفعہ8(4) کو منسوخ کرکے بڑی عدالت نے صحیح سمت میں صحیح قدم اٹھایا ہے جس میں دو سال سے زیادہ کی سزا پانے والا عوامی نمائندہ چناؤ لڑنے کے نااہل ہوجاتا ہے لیکن پہلے سے ایم پی یا ممبر اسمبلی تین مہینے کے اندر اپیل کر اپنے عہدے پر بنا رہ سکتا ہے۔ پارلیمنٹ کی سپرمیسی کا حوالہ دینے والے بھول جاتے ہیں کہ آئین کو نظرانداز کر کوئی قانون بنایا جائے تو بڑی عدالت کے پاس اس پر جائزہ لینے کا بھی اختیار ہے اور اسے منسوخ کرنے کا بھی۔ سیاسی پارٹی یہ دلیل دے رہی ہیں کہ عوامی نمائندہ قانون اور اطلاعات حق قانون کا ان کے خلاف بیجا استعمال ہوسکتاہے۔ کیا وہ ایسا ایک بھی قانون بتا سکتی ہیں جس کا بیجا استعمال نہ ہوتا ہو؟ دیش دنیا میں ایسا کوئی قانون نہیں جس کے بیجا استعمال کا اندیشہ بنا رہتا ہے لیکن اسکا مطلب یہ نہیں کہ غیراخلاقیت کوتحفظ دیا جائے۔ بدقسمتی سے ہماری سیاسی پارٹیاں ٹھیک ایسا کررہی ہیں۔ بلا شبہ پارلیمنٹ سپریم ہے لیکن نہ تو جمہوریت میں عوامی توقعات کو نظرانداز کیا جاسکتا ہے اور نہ ہی آئین کو۔ سیاسی پارٹیاں جان بوجھ کر ایسا کرنے پر آمادہ ہیں۔ آخر ایسی پارلیمنٹ اپنے وقار کی حفاظت کیسے کر سکتی ہے جو مجرمانہ کردار والے لوگوں کو تحفظ دینے اور سیاسی پارٹیوں کو منمانی کرنے کی چھوٹ دینے کی علامت بننے جارہی ہیں۔ جیسا کے میں نے کہا کہ ان کے پاپی پیٹ کا سوال ہے، اس حمام میں سبھی ننگے ہیں۔
(انل نریندر)

کیپٹن سوربھ کالیا کا قتل کیسے ہوا؟ خود قاتل کی زبانی

پاکستان کاجھوٹ اور مکاری ایک بار پھر ثابت ہوگئی ہے۔ ہربات ہر الزام سے انکار کرنے پر آمادہ پاکستان اس بار خود ایک پاکستانی کی زبانی بے نقاب ہوگیا۔ کارگل جنگ میں شہید کیپٹن سوربھ کالیا اور اس کے پانچ ساتھیوں کی موت کی اصلیت اور اس بارے میں پاکستان کا جھوٹ برسوں بعد اجاگر ہوگیا ہے۔ یو ٹیوب پرلوڈ ایک ویڈیو میں ایک پاکستانی فوجی کیپٹن کالیا اور اس کے ساتھیوں کے قتل کی ذمہ داری ایک پاکستانی فوجی کو بہت شیخی بھرے انداز میں قبول کرتے دکھایاگیا ہے۔اب تک پاکستانی حکمراں یہ ہی کہتے رہے ہیں کہ کیپٹن کالیا اوران کے ساتھیوں کا قتل پاکستانی فوجیوں نے نہیں کیا بلکہ ان کی لاش انہیں ایک کھائی میں پڑی ملی۔بتایا گیا کہ کیپٹن کالیا اور ان کے ساتھیوں کی موت خراب موسم کے چلتے یا جنگلی جانور کے حملے سے ہو سکتی ہے لیکن جس سلی گڑھی حالات میں ان لوگوں کی لاشیں ملی تھیں بھارت میں سبھی کو یقین تھا کہ یہ پاکستانی فوج کی وحشیانہ کرتوت رہی ہوگی۔ کیپٹن کالیا اور ان کے ساتھیوں کی لاشوں کودیکھ کر صاف لگتا تھا کہ ان کا قتل کرنے سے پہلے انہیں جم کر اذیتیں دی گئی تھیں۔ ان فوجیوں کی ہڈیاں ٹوٹی ہوئی تھیں، جسم پر سگریٹ اور سلاخوں سے داغے جانے کے نشان تھے۔ اس واردات سے صاف طور پر جنگی قیدیوں سے متعلق جنیوا معاہدے کی خلاف ورزی ہوتی ہے۔ تب سے اب تک کیپٹن کالیا کے والد ڈاکٹراین۔ کے کالیا اکیلے ہی اپنے بیٹے کے قصورواروں کو سزادینے کی لڑائی لڑ رہے ہیں۔ اب اس ویڈیو کے آنے سے معاملہ صاف ہوگیا ہے۔ قریب14 سال بعد پاکستان کا جھوٹ بے نقاب کرتا یہ ویڈیو ہے جس میں کیپٹن کالیا کابربریت آمیز قتل کرنے والے پاکستان کے فوجی نے خود اس بات کا انکشاف کر پاکستان کو کٹہرے میں کھڑا کردیا ہے۔ پاکستانی فوج کے چینل کے ذریعے ایک پروگرام میں اس ویڈیو کو یو ٹیوب پرجاری کیا جاچکا ہے۔ پاکستانی فوجی نے کیمرے کے سامنے قبول کیا ہے آگے بڑھ رہے کیپٹن کالیا کی ٹکڑی پر گولیوں کی بوچھار کی گئی تھی اس کے بعد لاشوں کو اپنے طریقے سے ٹھکانے لگا کر ہندوستانی فوج کے حوالے کردیاگیا۔ بقول فوجی گلِ خاندار اور ان کے ساتھیوں کو مار گرانے کی اطلاع انہوں نے کیپٹن علی اختر کو دے دی تھی۔ ویڈیو میں پاکستانی سپاہی گلِ خاندار اپنی اوراپنے ساتھیوں کی بہادری کے قصے سنا رہا تھا ۔ اس دوران وہ کہتا ہے کہ وہ کیپٹن کالیا اور ان کے ساتھی شکار کرنے آئے تھے اور خود شکار ہوگئے۔ یہ لائن آف کنٹرول کے نزدیک واقع چوکی پر تعینات تھا۔ ہم لوگوں نے دیکھا کہ کیپٹن کالیا ساتھیوں کے ساتھ ٹہو لینے کے لئے سرحد پار کررہے ہیں۔ ہمارے کمانڈر نے کہا انہیں نزدیک آنے دو ہم لوگ انہیں پکڑنا چاہتے ہیں لیکن ہمیں دیکھ کر بھاگنے کی کوشش کرنے لگے تو ہم نے ان پرفائر کردیا۔ سپریم کورٹ کے ایک وکیل اس ویڈیو کو بطور ثبوت پیش کرنے کی تیاری میں ہیں۔ انہوں نے کہا کہ پاکستان کی تاریخ رہی ہے کہ وہ پچھلے65 برسوں سے جھوٹ بولتا رہا ہے۔ ہماری سرکار کی ہمت نہیں ہے کہ 65 سال میں ہم پاکستان کومنہ توڑ جواب دے سکیں۔ کیپٹن کالیا اور ان کے فوجی ساتھیوں کو انصاف ملنا چاہئے۔ یہ لڑائی صرف ان کے والد کی ہی نہیں پورے دیش کی ہے۔ داؤ پر ہے دیش کا وقاراور عزت۔

 (انل نریندر)